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COVID-19 : उत्तर प्रदेश के बाल व महिला गृहों को भी अपनी चपेट में लिया, संक्रमित बच्चों व महिलाओं को किया गया आइसोलेट

अखिलेश कुमार

लखनऊ। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने उत्तर प्रदेश के बाल व महिला गृहों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। वर्तमान में 155 बच्चे और 21 महिलाएं कोरोना संक्रमित हो चुकी हैं। इन सभी को अलग रखकर इलाज शुरू कर दिया गया है। सभी बच्चों की हालत ठीक बताई जा रही है। सरकार ने बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए सभी जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय टास्क फोर्स गठित कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में सरकारी बाल व महिला गृहों की संख्या 56 है। स्वयंसेवी संस्थाएं भी कई गृह संचालित करती हैं। इस बार इन गृहों में रहने वाले बच्चों पर भी कोरोना संक्रमण का असर पड़ा रहा है। लखनऊ के ही बालिका गृह में रह रही 10 से 18 वर्ष की करीब 32 बालिकाएं कोरोना संक्रमित हो गई हैं। यहां करीब 100 बालिकाएं रहती हैं। प्रदेश में कुल 155 बच्चे संक्रमित हुए हैं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रत्येक बाल व महिला गृहों में क्वारंटाइन सेंटर बना दिए हैं। संक्रमित बच्चों व महिलाओं को आइसोलेट कर दिया गया है।

निदेशक महिला कल्याण मनोज कुमार राय ने बताया कि प्रत्येक बाल गृहों में डॉक्टरों को अटैच कर बच्चों का इलाज शुरू हो गया है। साथ ही टेलीमेडिसिन के जरिएये विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह ली जा रही है। बच्चों की देखभाल के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय टास्क फोर्स गठित कर दी गई है। इसमें मुख्य विकास अधिकारी, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, आइसीडीएस के जिला कार्यक्रम अधिकारी व वन स्टाप सेंटर के केंद्र प्रशासक सदस्य बनाए गए हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी/जिला बाल संरक्षण अधिकारी इसके सदस्य सचिव होंगे।

टास्क फोर्स अपने-अपने जिलों के बाल एवं महिला गृहों का नियमित निरीक्षण कर बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं व सेवाओं की निगरानी करेगी। गृहों में नियमित कोरोना संक्रमण की जांच, स्वास्थ्य उपकरण, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सा देखभाल व अस्पताल में भर्ती जैसे मामलों को टास्क फोर्स देखेगी। सभी जिलों में टास्क फोर्स की पहली बैठक 15 मई को होगी।

लखनऊ के बालिका गृह में कोरोना संक्रमित लड़कियों की देखभाल व अलग-अलग रखने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सेवा भारती आगे आई है। सेवा भारती ने इन बालिकाओं को अपने यहां आइसोलेट रखने व खान-पान का बीड़ा उठाया है। दरअसल, बालिका गृह में इतनी जगह नहीं थी कि इन संक्रमित बालिकाओं को अलग-अलग रखा जा सके। इसलिए सेवा भारती ने इन्हें अपने यहां रखने का प्रस्ताव दिया था। गुरुवार को 32 में से 29 बालिकाओं को शिफ्ट कर दिया गया। इनकी देखभाल के लिए महिला कल्याण के कर्मचारी व सुरक्षा के लिए होमगार्ड भी 24 घंटे मौजूद रहेंगे।

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