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Corona Vaccination: ड्रोन से कोरोना वायरस का टीका पहुंचाने की तैयारी, ड्रोन ऐसे करेगा मदद

नेहा पाठक
नई दिल्ली। देश में अधिक से अधिक लोगों तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाने के लिए सरकार हर संभव तरीके से पहुंच बना रही है। अगर आपके पास वैक्सीन ड्रोन के जरिए पहुंचाई जाएं तो आपको कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। दरअसल, केंद्र सरकार ने देश के दुर्गम इलाकों में ड्रोन के जरिए वैक्सीन पहुंचाने की सप्लाई करने की एक योजना तैयार की है। सरकार ने इस योजना को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के उस स्टडी के बाद स्वीकार किया है। जिसमें कहा गया है कि ऐसा किया जाना संभव है।

सरकार की तरफ देश में सभी वैक्सीनों की खरीद करने वाली सराकरी कंपनी HLL लाइफ केयर (HLL Lifecare) की सब्सिडिरी कंपनी HLL Infra Tech Services Limited ने देश के दुर्गम इलाकों में ड्रोन के जरिए वैक्सीन की सप्लाई के लिए इच्छुक कंपनियों से EOI (Expression of Interest) मंगाया है। अभी तक तेलंगाना ही देश का ऐसा राज्य है जो ड्रोन के जरिए वैक्सीन सप्लाई की योजना पर विचार कर रहा है।

CMR की शर्त है कि इस योजना के लिए काम करने वाले ड्रोन की उड़ान क्षमता 35 किमी होनी चाहिए। और इनको 100 मीटर की ऊंचाई पर उड़ना चाहिए। इस मामले में 22 जून तक बिड सब्मिट करना है। वैक्सीन की डिलिवरी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ICMR ने IIT कानपुर के साथ एक सफलतापूर्वक feasibility स्टडी की है। इसके बाद यह फैसला लिया गया है।

ड्रोन कैसे करेगा काम

इस बारे में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के मुताबिक, ड्रोन में वर्टिकल उड़ान की क्षमता होनी चाहिए। कम से कम 4 किलो बोझ लेकर उड़ने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा उसमें सामान की आपूर्ति करके अपने कंट्रोल सेंटर में लौटने की क्षमता भी होनी चाहिए।

ड्रोन की टेक ऑफ लैंडिंग DGCA की गाइडलाइंस के मुबाबिक होगी। इस योजना में पैराशूट आधारित डिलिवरी को वरीयता नहीं दी जाएगी। वैक्सीन को सफलता पूर्वक जमीन पर लैंड करने पर फोकस होगा। इसके अलावा ड्रोन ऐसा होना चाहिए जो लगातार अपने कमांड सेंटर से जुड़ा हो और जिसकी लगातार निगरानी की जा सके।

इधर भारत में कोरोना वायरस के कहर के बीच एक राहत भरी खबर है। जो लोग कोरोना की दोनों डोज लगवा चुकें हैं उनकी सेहत कोरोना से जंग लड़ने के लिए बिल्कुल तैयार हो गई है। इस बारे में हुई एक स्टडी से पता चला है कि कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके 94 फीसदी लोगों को कोरोना संक्रमित होने पर ICU में भर्ती की जरूरत नहीं पड़ी। जिनमें 77 फीसदी लोगों को तो अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी नहीं पड़ी।

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