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‘Black Fungas ‘ का इंजेक्शन नहीं बिकेगा बाजार में, जारी की गाइडलाइंस

समय टुडे डेस्क। कोरोना वायरस के साथ ही ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है। ब्लैक फंगस को कई राज्यों ने महामारी घोषित कर दिया है। इस बीच उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने ब्लैक फंगस में इस्तेमाल होने वाली दवा लाइपोसोमल एम्फोटेरीसीन – बी (Liposomal amphotericin – B) इंजेक्शन (injection) और दवाइयों की खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगा दी है। सरकार ने दवा बेचने के लिए नए नियम बना दिए हैं।

स्टडी के अनुसार, कोरोना से ठीक हो चुके वे मरीज जो पहले से हृदय से जुड़ी किसी प्रकार की समस्या से जुझ रहे हैं वे बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें. अगर आपको सीने में दर्द या ऊपर बताए गए किसी तरह के लक्षण दिखाई दें तो खुद उपचार ना करें, बल्कि तुरंत डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं। इस नए नियम के तहत उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने दवा खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कारपोरेशन सीधे कंपनियों से दवा खरीद रहा है। वहीं कंपनियों ने प्राइवेट मेडिकल स्टोर को इंजेक्शन और जरूरी दवाएं देने से मनाकर दिया है।

इधर ब्लैक फंगस भी तेजी से फैलने लगा है। ब्लैक फंगस मरीजों को लाइपोसोमल एम्फोटेरीसीन-बी इंजेक्शन की डोज देनी होती है। कई मरीजों को दिन में एक बार तो कुछ को दो बार देने की आश्यकता पड़ती है। आम तौर पर एक हफ्ते में इंजेक्शन की खुराक देनी पड़ती है। बहुत से मरीजों को डॉक्टर इससे अधिक दिनों तक इंजेक्शन की सलाह देते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लखनऊ में 70 से ज्यादा मरीज कई अस्पतालों में भर्ती हैं। जरूरत के बावजूद शासन से स्वास्थ्य विभाग को पर्याप्त मात्रा में फंगल इंफेक्शन में लगने वाले इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग (Medical education department) की तरफ से लखनऊ को एम्फोटेरिशन बी 50 को 384 इंजेक्शन दिए गए हैं। जबकि जिला स्वास्थ्य विभाग ने 3,000 इंजेक्शन की डिमांड चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजी थी।

उधर अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ब्लैक फंगस से पीड़ित जिन मरीजों को बाजार से एम्फोटेरीसीन-बी इंजेक्शन बाजार से नहीं मिलेगा तो उन्हें यह दवा राज्य सरकार उपलब्ध करवाएगी।

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