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BJP- JDU के खिलाफ रणनीति तय करने आ रहे राजद सुप्रीमो लालू यादव, CBI बढ़ा सकती है परेशानी

ज्योति झा
पटना। साढ़े तीन साल के ब्रेक के बाद लालू प्रसाद की राजनीति की विधिवत शुरुआत फिर होने जा रही है। राजद के सभी विधायकों, विधान पार्षदों एवं विधानसभा चुनाव में हारे हुए प्रत्याशियों के बीच लालू नौ मई को सामने आ रहे हैं। बैठक वर्चुअल होगी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पहल पर लालू खुद दिल्ली स्थित डॉ. मीसा भारती के आवास से ही शिरकत करेंगे। राजद के 75 विधायकों के साथ बिहार में भाजपा एवं जदयू की संयुक्त शक्ति के खिलाफ लड़ाई की नई रणनीति तय करेंगे। हारे हुए प्रत्याशियों की व्यथा जानेंगे। सबको कोरोना के खतरे से निपटने का हौसला देंगे और इसी के सहारे बैटल फील्ड को नए तरीके से दुरुस्त करेंगे। लालू की सक्रियता के साथ ही बिहार में वोटरों की गोलबंदी के लिए राजनीति का नया अध्याय शुरू होगा। इस बीच सीबीआई लालू की मुश्किलें बढ़ा सकती है।

मामूली अंतर से सत्ता से वंचित रह गया राजद

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में राजद सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आया था। फिर भी मामूली अंतर से सत्ता से वंचित रह गया। इसका पछतावा राजद प्रमुख को भी है। यही कारण है कि उन्होंने जेल में रहते हुए भी महागठबंधन की सरकार बनाने की पूरी कोशिश की। कामयाब नहीं हुए तो अब नई लड़ाई की तैयारी है।

लालू के समर्थकों पर दोतरफा खतरा : राजद

राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव एवं प्रदेश महासचिव विनोद यादव ने वर्चुअल बैठक का ब्योरा दिया है। शक्ति सिंह ने बताया कि रविवार को दोपहर दो बजे से राजद के 75 विधायकों के साथ लालू प्रसाद की वर्चुअल मीटिंग होगी। विनोद यादव ने बताया कि गरीबों के सामने अभी दोतरफा खतरा है। कोरोना संक्रमण के साथ भुखमरी की भी स्थिति है। ऐसे में लालू प्रसाद चुपचाप बैठे नहीं रह सकते हैैं। कोरोना का खतरा कम होते ही राजद प्रमुख पटना आएंगे। सबसे खुलकर मिलेंगे। अभी डॉक्टरों ने उन्हें बाहर निकलने से मना किया है। इसलिए वर्चुअल मीटिंग की जा रही है।

सीबीआई लगा सकती है बैठक पर ग्रहण

लालू की बैठक के कार्यक्रम तय होते ही राजद को सीबीआई से भी खतरा नजर आ रहा है। चारा घोटाले में राजद प्रमुख को झारखंड हाईकोर्ट से आधी सजा पूरी होने के बाद स्वास्थ्य कारणों से भी जमानत मिली है। ऐसे में सीबीआई राजनीतिक मीटिंग को आधार बना सकती है। अदालत को बता सकती है कि जमानत मिलते ही अचानक उनकी तबीयत कैसे ठीक हो गई कि एम्स से बाहर आ गए और राजनीतिक गतिविधियां भी शुरू कर दीं।

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