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व्रत ………

स्त्री के व्रत ने 
चांद को अरसे से वैसा ही जिंदा रखा
जैसा वो रात को दिखाई देता है।
आदमी की उम्र कम हो गयी
गाँव के खेतों में
सरहद पर 
और घर के रखवाली करते हुए
मगर औरत आज भी 
जिंदा रखती है अपने चांद को 
जाने के बाद 
वो चांद कभी नहीं लौटता 
उस भूख प्यास से लड़ती स्त्री के पास
जो चमकते चांद से दोस्ती कर बैठा
फिर ये चांद को क्यों पूजते हैं
लड़ जाती हैं स्त्रियाँ 
अपने चांद की आयु के लिये
मगर मुस्कुराते हुए छुप जाता है 
बिना पीड़ा जाने 
उस बिलखती स्त्री की 
जो इंतजार में खुद को गुम कर लेती है 

~शिखा सिंह
फतेहगढ़, उत्तर प्रदेश

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