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वो लोग कौन होते हैं!

जो आपको अचानक छोड़ जाएँ
और कभी पलट कर न देखें।
जो हाथों की गर्म लकीरों पर
लिखी हुई आपकी मुस्कराहट
खुरच खुरच कर निकाल दें ।
जो आपको जलाने के लिए
फ़ासलों की धधकती हुई
आग में बे-ख़ौफ़ कूद पड़ें ।
आप रातों में जिनका चेहरा !
दीवार की शिकनों
किताब की सतरों
और उम्मीद के तारों से
बनाते बनाते थक जाएँ।

वो लोग कौन होते हैं !

जो आपको ज़ख़्म दें !
रुलाएं !
चीख़ने पर मजबूर करें
और आख़िर-कार पागल कर दें!
फिर एक रोज़
अचानक फ़ोन करके पूछें
कैसे हो।

वो लोग “वो” होते हैं !

जिन्हें आपने एक रात
किसी जज़्बाती लम्हें में
बता दिया था।
कि वो आपके लिए कितने क़ीमती हैं।
आप उन्हें खोना नहीं चाहते।
आप उनके साथ ज़िन्दगी गुज़ारना चाहते हैं।
आप उनसे मोहब्बत करते हैं।
याद रखिये !
ज़िन्दगी के सारी सियाह रातें
उस एक रात के रौशन जज़्बाती लम्हें की देन हैं।

~ वर्षा सक्सेना

कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश

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