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महिलाएं होगी जागरूक तभी संरक्षित होगा पर्यावरण

नेहा वर्मा
कानपुर नगर। मां भगवती मेमोरियल चैरिटेबल सोसायटी और पहल सेवा संस्थान के द्वारा चलाए जा रहे “स्वच्छ मिशन”अभियान में महिलाओं ने संस्था के द्वारा आयोजित वेविनार में भाग लिया और मेंस्ट्रूअल हाइजीन से जुड़े सवालों पर चर्चा की और अपनी समस्याओं को बताया। वेबीनार का मुख्य उद्देश्य महावारी के समय महिलाओं को होने वाली समस्याओं से अवगत कराना और उन 5 दिनों में स्वच्छता और सुरक्षा के लिए जागरूक करना है।

इस अवसर पर डॉक्टर ज्योति सिंह ने वेबिनार के द्वारा लड़कियों को पीरियड्स के उन 5 दिनों में स्वच्छता और सुरक्षा के लिए जागरूक किया। पीरियड्स के बारे में बात करने में न केवल गांव में बल्कि शहरों में भी महिलाएं झिझकती है और इसी झिझक के कारण बहुत सी महिलाएं अपने स्वास्थ्य को खतरे में डाल देती है। पीरियड्स के दौरान कपड़े की जगह सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करना सुरक्षात्मक होता है लेकिन लंबे समय तक एक ही पैड को लगाने से पसीने के कारण पैड में नमी आ जाती है क्योंकि सेनेटरी पैड्स में लगभग 90% प्लास्टिक होती है देर तक ऐसा होने के कारण वजाइना में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है वही रक्त स्राव और पसीने की वजह से बदबू आने लगती है योन रोग और प्रजनन मार्ग में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे दिनों में सफाई को नजरअंदाज करने से सर्वाइकल कैंसर जैसी समस्या भी हो सकता है।

समस्याओं के समाधान के लिए संस्था की सचिव अनुराधा सिंह ने महिलाओं को मेंस्ट्रूअल कप को इस्तेमाल करने की सलाह दी क्योंकि यह पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। एक मेंस्ट्रूअल कप का इस्तेमाल 10 साल तक किया जा सकता है और जब इसे डिस्पोज ऑफ किया जाएगा तो भी यह पर्यावरण के लिए नुकसानदायक नहीं होगा ।जबकि एक सेनेटरी पैड में 90% से ज्यादा प्लास्टिक होता है जिस नष्ट होने में लगभग 300 से 500 वर्ष तक का समय लग जाता हैं।

मेंस्ट्रूअल कप के इस्तेमाल से महिलाओं में जलन, खुजली, गीलेपन और कैंसर जैसी कोई समस्या नहीं होती है यह महिलाओं और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है।

इस वेबीनार में डा अपूर्वा वशिष्ठ, डॉ मंजू जैन, सुरभि द्विवेदी, शुभम वर्मा, शिखा अग्रवाल, ललिता शर्मा, मनीषा दिक्षित, नेहा कटियार, मानसी मिश्रा, उल्लासा, लवली सक्सेना सहित लगभग 22 महिलाओ ने वेबीनार में हिस्सा लिया।

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