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नाथ ऐसी कृपा छांव पल कीजिए ………

नाथ ऐसी कृपा छांव पल कीजिए।
सुमन खुशियां उजाले प्रबल कीजिए।

जो शिथिल हौसलें पस्त होकर गिरे,
लक्ष्य रफ्तार उनकी नवल कीजिए।

बढ़ रही हैं जलन द्वैष विष बेल जो,
उस हदय की कुटिलता तरल कीजिए।

तपिश सूर्य की अवरोध बेशक भरें,
पर कठिनता भरे प्रश्न हल कीजिए।

जब शिखरता सुखद भी जगत में मिले,
तब हदय उर हमारा सरल कीजिए।

इस धरा की मिटा दो जटिलता सभी,
अब क्षमा भी करो भू धवल कीजिए।

जगत जगदीश है डोर अब आपके,
मन चरण रज शरण का कंवल कीजिए।

~ राखी कुलश्रेष्ठ
कानपुर, उत्तर प्रदेश

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