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दुख की एक दुपहरी बीती, निश्चय सुख का आना तय है ………..

दुख की एक दुपहरी बीती,
निश्चय सुख का आना तय है।।
क्षोभ विछोह, वियोग ,व्यथा,
जीवन से इनका जाना तय है।।

                         पीड़ा से आंगन भर गया,
                         पीर ने आ किया बसेरा।।
                         निशा के जाते ही जैसे,
                         किरणों का छाना तय है।।

पतझड़ में कितने पात झड़ें,
अब कुछ कहना व्यर्थ है।।
बगिया के छोटे उपवन में,
नवकोपलँ का आना तय है।।

                  न मिल सके मजबूरी बोली,
                  मन से मन की दूरी  बोली।।
                  किंतु एक दिन निश्चय ही,
                  किस्मत में  मिल जाना तय हैं। 

क्षुधा, प्यास औऱ गरीबी ने,
कितना अवसाद भर दिया ,।।
पेट भरेगा क्षुधा मिटेगी,
रोटी का अब पाना तय है।।

                    दुख की एक दुपहरी बीती,
                    निश्चय सुख का आना तय है।
                    हैं विनाश तो सृजन भी होगा,
                    बसंत का आ जाना तय है।।

तम की रात ढलेगी अब,
सूरज का आना तय है।।
मत डरो इस काल से अब,
सबको सुख पाना तय है।।

~ आकांक्षा द्विवेदी
बिंदकी, फतेहपुर

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