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औरत की आजादी ……… स्त्री सशक्तिकरण

स्त्री सशक्तिकरण


ढ़ने लिखने में बहुत सुंदर लगते हैं ,
लेकिन कहाँ हैं सब वास्तविक दुनिया मे
दहेज की आग में जलकर मर जाती है
वो भी तो एक नारी होती है
क्यों नहीं बदलते समीकरण स्त्री के लिए
छोटी उम्र में घर से विदा कर दी जाती है
वो भी बिना उसकी मर्जी के
क्यों उसकी इच्छा दबा दी जाती है
हर नजर में सिर्फ माल होती है
इज्जत का तो आज भी सवाल नहीं
गृह कार्य में दक्ष होना आज भी जरूरी है
सहन करना पहली प्राथमिकता है
वरना आज भी नारी वहीं खड़ी है ।
सच्चाई कड़वी होती है
बदल रहा है समाज यूँ तो कहने को
लेकिन नारी की आजादी आज भी
दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है।

वर्षा वार्ष्णेय,
अलीगढ़

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