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अपना इतिहास लिखते समय रखें भारतीय दृष्टिकोण का ध्यान

– इतिहास संकलन समिति की प्रांतीय बैठक को राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री संजय मिश्र ने किया संबोधित
– कहा, अल्पज्ञात नायक-नायिकाओं, घटनाओं-स्थानों एवं तत्कालीन प्रतिबंधित साहित्य पर भी लिखें

● श्रुति शुक्ला

कानपुर नगर। इतिहास लेखक भारतीय व पाश्चात्य दृष्टिकोणों में अंतर को समझें और भारतीय इतिहास पर लिखते समय इसका ध्यान रखें। किसी घटना को लिखते समय दृष्टिकोण बदलते ही उसका भाव व अर्थ भी बदल जाता है इसलिए लिखने में भारतीय दृष्टिकोण का सदैव ध्यान रखें। 

यह बात अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री संजय मिश्र ने कही। वह वृहस्पतिवार को करवालोनगर स्थित केशव भवन में आयोजित इतिहास संकलन समिति की कानपुर प्रांत की बैठक को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में अभी तक सत्ता में रहे लोगों ने जिन्हें महिमामण्डित किया, उन्हीं चंद लोगों पर इतिहास केंद्रित रहा। जबकि क्षेत्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में क्रांतिकारियों, घटनाओं व स्थानों को उपेक्षित किया गया। समिति से जुड़े विषय विशेषज्ञ व लेखक ऐसे ही अल्पज्ञात नायक-नायिकाओं, अल्पज्ञात घटनाओं-स्थानों और तत्कालीन प्रतिबंधित साहित्य पर लिखें। 


संचालन कर रहे समिति के प्रांत अध्यक्ष वीएसएसडी कॉलेज के इतिहास शिक्षक डॉ. पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि लेखक कानपुर के इतिहास पर 15 अगस्त तक रचनाएँ सकते हैं। इसके बाद उनके संकलन और संपादन का कार्य शुरू होगा। अध्यक्षता समिति के प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष वीएसएसडी कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल मिश्रा ने की। इस अवसर पर प्रांत कोषाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप शुक्ला, डॉ. अंगद सिंह, श्रीप्रकाश तिवारी, डॉ. सुबोध बिहारी सक्सेना, अमरनाथ जी, डॉ. मनीष द्विवेदी, सुमन शुक्ला, सारिका अवस्थी, पारुल मिश्रा, डॉ. आदेश गुप्त, मुकेश श्रीवास्तव, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. गिरीश मिश्रा, सचिन शुक्ला, पवन पाण्डेय, सुनील कुमार पाण्डेय, सुनील कुमार सिंह, हरिओम प्रजापति, महेंद्र सिंह बिष्ट आदि उपस्थित रहे।

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